| भले ही ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने बड़े हर्ष के साथ यह बयान दिया हो कि ईरान-पाकिस्तान-भारत (आईपीआई) गैस पाइपलाइन पर काम 45 दिन के अंदर पूरा हो जाएगा, पर भारत अब खुद इसको लेकर किसी जल्दी में नहीं है। |
| इसकी पुष्टि करते हुए यूपीए सरकार के पेट्र्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा कहते हैं- इस मामले पर निर्णय लेने के लिए भारत किसी जल्दबाजी में नहीं है। देवड़ा पिछले हफ्ते ही इस मामले को लेकर पाकिस्तान का दौरा कर लौटे हैं। उन्होंने बताया - गैस के वितरण का मामला अभी भी सुलझा नहीं है। |
| हालांकि गैस कीमतों के अलावा अब भारत के पास चिंता की और वजहें भी हैं। मसलन, ईरान और पाकिस्तान में चल रही राजनीतिक उठापटक। इसके अलावा, भारत के सामने फिक्रमंदी की सबसे बड़ी वजह है, ईरान पर अमेरिका की ओर से सैन्य कार्र्रवाई की चेतावनी। मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पहले ही ईरान पर हमले की चेतावनी दे चुके हैं, तो राष्ट्रपति पद की दावेदार हिलेरी क्लिंटन भी यही सुर अलाप रही हैं। |
| भारत को इस बात की चिंता है कि अगर अमेरिका पाइपलाइन परियोजना पर भी बम-बारी कर देता है तो भारत के भारी-भरकम निवेश का क्या होगा? वहीं दूसरी ओर भले ही पाकिस्तान में नई सरकार का चुनाव हो चुका है फिर भी यूपीए सरकार यह देखना चाहती है कि वहां राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठेगा। |
| हालांकि देवड़ा, ने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वार्ता रोक दी जाएगी। मार्क्सवादियों के दबाव की जहां तक बात है, देवड़ा ने कहा- मार्क्सवादियों के साथ यही समस्या है। |
| उन्हें नहीं पता कि कहां रेखा खींचनी है। अगर हम निवेश कर देते हैं और उसके बाद ईरान में कुछ हो जाता है तो क्या ए.के. गोपालन भवन (मार्क्सवादी पार्टी का मुख्यालय) इसकी भरपाई करेगा? |
| मार्क्सवादियों के साथ यही समस्या है। उन्हें नहीं पता कि कहां रेखा खींचनी है। अगर हम निवेश कर देते हैं और उसके बाद ईरान में कुछ हो जाता है तो क्या ए.के. गोपालन भवन (मार्क्सवादी पार्टी का मुख्यालय) इसकी भरपाई करेगा? - मुरली देवड़ा, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री |
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Tuesday, May 6, 2008
अमेरिकी खौफ के साये में ईरान गैस पाइपलाइन
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